नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने कानून मंत्रालय को एक व्यक्ति एक सीट का प्रस्ताव भेजा है। जिसमें नए प्रावधान और संशोधनों को भी शामिल किया गया है। इस प्रस्ताव से जुड़ा बदलाव कानून में शामिल होने पर अधिकतम दो सीट से चुनाव लड़ने की छूट खत्म हो जाएगी और उम्मीदवार सिर्फ एक ही सीट से चुनाव लड़ पाएगा। दरअसल, इससे पहले तक उम्मीदवार कितनी भी सीटों से चुनाव लड़ सकता था। लेकिन बाद में आयोग ने कानून में बदलाव करवाकर अधिकतम दो सीटों तक सीमित कर दिया था। अब अतिरिक्त चुनाव खर्च, छोड़ने वाली सीट के मतदाताओं की भावनाएं आदि को ध्यान में रखते हुए एक उम्मीदवार एक सीट के प्रावधान को लेकर जन प्रतिनिधित्व प्रणाली में बदलाव का प्रस्ताव आयोग ने दिया है।

पहले कितनी भी सीटों पर लड़ सकते थे चुनाव

बता दें कि 1996 के पहले तक चुनाव में कोई उम्मीदवार एक साथ कितनी भी सीटों से चुनाव लड़ सकता था। इसकी अधिकतम सीटों की संख्या तय नहीं थी। बस केवल यही नियम था कि जनप्रतिनिधि केवल ही एक ही सीट का प्रतिनिधित्व कर सकता है। 1996 में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट, 1951 में संशोधन किया गया और यह तय किया गया कि अधिकतम सीटों की संख्या दो हो गई।

रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल ऐक्ट, 1951 के सेक्शन 33 में यह व्यवस्था दी गई थी कि व्यक्ति एक से अधिक जगह से चुनाव लड़ सकता है, जबकि इसी अधिनियम के सेक्शन 70 में कहा गया है कि वह एक बार में केवल एक ही सीट का प्रतिनिधित्व कर सकता है। ऐसे में साफ है कि एक से ज्यादा जगहों से चुनाव लड़ने के बावजूद प्रत्याशी को जीत के बाद एक ही सीट से प्रतिनिधित्व स्वीकार करना होता है।

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