बीकानेर।अमरसिंहपुरा स्थित अस्मत अमीन सभागार में सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी की ओर से भारतीय संस्कृति में सूफ़ी परंपरा का प्रभाव विषय पर विचार गोष्ठी और सम्मान कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. सदफ़ सिद्दीक़ी को उनके शैक्षिक व साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सोसायटी अध्यक्ष नदीम अहमद नदीम ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन सकारात्मक चिंतन, बौद्धिक संवाद और सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ाते हैं। डॉ, सदफ़ सिद्दीक़ी का परिचय इमरोज नदीम ने प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि डॉ. मन मोहन सिंह यादव ने कहा कि सूफी परंपरा ने समाज को एकता, भाईचारे और आध्यात्मिक ऊंचाई का संदेश दिया तथा जीवन को सरल और सहज बनाने का मार्ग दिखाया।

विशिष्ट अतिथि मोहम्मद सादिक़ लोदी सेवानिवृत तहसीलदार ने गंगा-जमुनी तहज़ीब को साझा विरासत का प्रतीक बताया। उर्दू विद्वान अनीसुद्दीन सिद्दीक़ी ने उर्दू को भारतीय भाषा बताते हुए कहा कि वह किसी एक धर्म की प्रतिनिधि नहीं है, बल्कि भारतीयता की पहचान है।


समापन में अरमान नदीम ने आभार जताया। कार्यक्रम में संजय जनागल, संजय श्रीमाली, फैज़ान सिद्दीक़ी डॉ. आदित्य शर्मा, अनीसुद्दीन सिद्दीकी, इसरार हसन कादरी, पीयूष यादव, अलादीन निर्बाण, जावेद अली, घनश्याम गहलोत, देवेंद्र, मनिंदर सिंह, रेशमा, रुखसार, तसनीम बानो आदि की गारिमामय उपस्थिति रही।



