एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के बिल्डिंग्स को ज़ब्त करने की कार्रवाई शुरू करने की खबर
रामपुर में मौजूद जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पहले रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी RDA की तरफ से बिना प्लान के बनी 38 बिल्डिंग्स को गिराने के ऑर्डर के बाद यूनिवर्सिटी में पढ़ाई को लेकर संकट की आशंका गहरा गई थी, अब एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के इन बिल्डिंग्स को ज़ब्त करने की कार्रवाई शुरू करने की खबर से एक बार फिर स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर पड़ने का डर है।
कुछ महीने पहले यूनिवर्सिटी की 38 बिल्डिंग्स को गिराने का ऑर्डर जारी होने के बाद न सिर्फ स्टूडेंट्स बल्कि समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी विरोध में उतर आए थे। समाजवादी पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट अखिलेश यादव ने भी यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में ED की कार्रवाई की खबर के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध का मुद्दा गरमाने की संभावना है। यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा अब बिल्डिंग कोड तक ही सीमित नहीं रहा। इससे स्टूडेंट की पढ़ाई, इंस्टीट्यूशन की एक्टिविटी और लोकल पॉलिटिक्स पर इसके असर को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी की 38 बिल्डिंग्स को गिराने का मामला कमिश्नर कोर्ट में विचाराधीन है। रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के जारी किए गए, गिराने के ऑर्डर को यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने चुनौती दी है। ऐसे में, जब तक मामला सुलझ नहीं जाता, बिल्डिंग्स के खिलाफ एक्शन को लेकर स्थिति नाजुक बनी हुई है। अब, ED के बिल्डिंग्स को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करने की खबर से यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।
इस मामले में, बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सतनाम सिंह मट्टू का कहना है कि ED ने जौहर यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स की कीमतों का ग़लत अंदाज़ा लगाया है। ये सभी बिल्डिंग्स 2006 से 2014 के बीच बनी थीं। उस समय बिल्डिंग्स के कंस्ट्रक्शन का खर्च अलग था, जबकि ED 2026 के हिसाब से कंस्ट्रक्शन का खर्च बता रहा है, जो पूरी तरह से ग़लत है। दूसरी ओर, बार एसोसिएशन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सरोजीत सिंह ने ED की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ED मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है और इसे RDA की कार्रवाई से नहीं जोड़ा जा सकता।
जौहर यूनिवर्सिटी में एक बार फिर स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर असर पड़ने की आशंका




