इलेक्शन कमीशन के डेटा के मुताबिक SIR की वजह से अब तक करीब 6 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। विपक्ष ने इसे चोर दरवाज़े से लाया गया NRC बताया है और आरोप लगाया है कि मनमाने तरीके़ से नाम हटाने और डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों के बहाने सही वोटर्स को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है।
23 विपक्षी पार्टियों और इंडिपेंडेंट MP कपिल सिब्बल ने मंगलवार को मिलकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें SIR प्रोसेस और इलेक्शन कमीशन के ज़रिए चुनाव से जुड़े दूसरे मामलों पर चिंता जताई गई। कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश ने कहा कि चीफ जस्टिस से संपर्क करने का फैसला 8 जून को हुई इंडिया जनबंधन मीटिंग में लिया गया था, जिसमें 21 पॉलिटिकल पार्टियों और एक इंडिपेंडेंट मेंबर ने हिस्सा लिया था। रमेश ने X पर लिखा, विपक्षी पार्टियां ’SURE‘ यानी यकजहती ,(Solidarity)، यूनिटी और (Resistance) के प्रिंसिपल पर मजबूती से खड़ी हैं। उन्होंने कन्फर्म किया कि चिट्ठी पर 23 विपक्षी पार्टियों और एक इंडिपेंडेंट मेंबर ने साइन किए थे।
तृणमूल कांग्रेस के MP डेरेक ओब्रायन ने कहा कि आम आदमी पार्टी और DMK भी इस कैंपेन में शामिल हुए हैं और लेटर पर साइन किए हैं। उनका हिस्सा लेना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि दोनों पार्टियां हाल ही में कांग्रेस के साथ मतभेदों की वजह से इंडिया ब्लॉक की कुछ मीटिंग्स से दूर रही थीं।
क्या SIR के आधार पर पासपोर्ट से वंचित करना सही है
TMC MP सागरिका घोष ने कहा कि विपक्ष ने न्यायपालिका से उस तरीके के खिलाफ अपील की है जिससे BJP, SIR प्रोसेस में हेर-फेर कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, लेटर में चुनाव आयोग के तरीके और परफॉर्मेंस को लेकर भी बड़ी चिंताएं जताई गई हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कांग्रेस और कई दूसरी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग के SIR कदम पर बार-बार सवाल उठाए हैं। इन पार्टियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव करने का यह तरीका योग्य वोटरों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकता है। बदलाव का प्रोसेस अब एक साल पूरा कर चुका है और अभी 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है।
इलेक्शन कमीशन के डेटा के मुताबिक, अब तक वोटर लिस्ट से करीब 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं, जिसमें अकेले दूसरे फेज में 18.5 करोड़ से ज़्यादा नाम हटाए गए हैं। इलेक्शन कमीशन का कहना है कि इस प्रोसेस से यह पक्का होता है कि सिर्फ एलिजिबल वोटर ही लिस्ट में रहें, लेकिन अपोजिशन पार्टियों ने इसकी कड़ी आलोचना की है, इसे बैकडोर NRC कहा है और आरोप लगाया है कि मनमाने तरीके से बाहर करने और डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों का बहाना बनाकर सही वोटरों को हटाया जा रहा है।
23 विपक्षी पार्टियों ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर SIR प्रोसेस पर सवाल उठाए
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