हमारे मुल्क की तक़दीर है जेन ज़ी,
नए इंक़लाब की तस्वीर है जेन ज़ी
लगा देगी ये अब तो आग पानी में,
बदलते दौर की तदबीर है जेन जी
झुका देगी ये ज़ालिम की हुकूमत को,
कि अदल-ओ-इंसाफ़ की ताबीर है जेन जी
अंधेरों का हर इक खेल भी ख़त्म कर देगी,
उजालों की नई तनवीर है जेन ज़ी
मिटा पाएगा कोई अब न दुनिया से,
कि सच्चे जज़्बों की तहरीर है जेन ज़ी
बिगड़ते काम सब के ही संवारेगी,
कि अब क़िस्मत की कोई लकीर है जेन ज़ी
न रोके से रुकेगी ये कभी अब तो,
कि फ़ैसलों की अजब शमशीर है जेन ज़ी
बदल देगी ये दुनिया को इशारों से,
नए दौर की इक तामीर है जेन ज़ी
हिसाब तो देना होगा अब हर इक सितमगर को,
बग़ावत की नई तफ़्सीर है जेन जी
धागे में ये पिरोती है सभी को एक
मुहब्बत की हसीं ज़ंजीर है जेन ज़ी
सुनो! अच्छे दिन अब फिर लौट आएंगे
ऐ शाहीन! वक़्त की अक्सीर है जेन ज़ी
(शायरा रफ़त आसिया शाहीन (विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश) 95156 05015




