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इमदादुल्लाह बासित के दीवान का विमोचन

बीकानेर. खानकाहे-अदब, बीकानेर के तत्वावधान में बीकानेर के शायर इमदादुालाह “बासित” के दीवान ‘कश्फे सुखन’ का विमोचन रविवार को महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम, नागरी भंडार में किया गया। डा ज़िया उल हसन क़ादरी ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब ने कहा कि बासित साहिब दीवान की बुनियादी शर्तों को पूरा करते हैं। उन्होंने वर्षों की मेहनत से शायरी में यह मक़ाम हासिल किया है। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए जाकिर हुसैन कॉलेज, दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर और उर्दू आलोचक डा मुहम्मद मुस्तमिर ने कहा कि बासित साहिब की शायरी किसी
एक विषय तक महदूद नहीं है बल्कि उसमें समाज और जिंदगी के विभिन्न विषय समाहित हैं। इनकी भाषा शैली साफ सुथरी और प्रभावशाली है। विशिष्ठ अतिथि मौलाना इरशाद क़ासमी ने कहा कि बासित की शायरी में सच्चाई नज़र आती है। इस अवसर पर आयोजित मुशायरे में
डा मुस्तमिर, ज़ाकिर अदीब, बुनियाद हुसैन ज़हीन, डा ज़िया उल हसन क़ादरी, असद अली असद, रवि शुक्ला, अमित गोस्वामी, अब्दुल जब्बार जज़्बी, मुहम्मद इसहाक गौरी, अमर जुनूनी और राजेंद्र स्वर्णकार ने अपनी ग़ज़लें सुना कर दाद हासिल की। कार्यक्रम में नंदकिशोर सोलंकी, ग़ुलाम
मुस्तफा बाबू भाई, राजेंद्र जोशी, डा जगदीशदान बारहठ, बाबूलाल छंगाणी, मुक्ता तैलंग, इसरार हसन कादरी, अग्निहोत्री, अविनाश व्यास, महेश जोशी, योगेंद्र पुरोहित, नदीम अहमद नदीम, फारूक चौहान, कंवर नियाज मुहम्मद, डा कृष्णलाल बिश्नोई, विप्लव व्यास, डा नरसिंह बिनानी, मौलाना इम्तियाज़, हाफ़िज़ अजमल, हनुवंत गौड़, अलीमुद्दीन जामी समेत शहर के 100 से अधिक कवि, शायर और गणमान्य लोग उपस्थित थे। असद अली असद ने आगंतुकों का स्वागत किया। मुफ्ती सद्दाम हुसैन क़ासमी ने शायर का परिचय प्रस्तुत किया। रवि शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने किया।

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