Monday, April 27, 2026
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शाद जामी की स्मृति में सजी काव्य संध्या, त्रिवेणी संगम में बही प्रेम और सद्भाव की धारा

बीकानेर। हिंदू मुस्लिम एकता के अलंबरदार और सुप्रसिद्ध शायर हाफिज-़ओ-क़ारी हाजी ग़ुलाम रसूल शाद जामी की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बीकानेर की फ़ज़ा अदब और भाई-चारे के रंगों से सराबोर हो गई। ’’जामी उर्दू अकादमी’’ द्वारा शीतला गेट स्थित मोहल्ला दमामियान में आयोजित विशाल कवि सम्मेलन एवं मुशायरा देर रात तक चला, जिस में हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के संगम ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

शाद जामी थे बीकानेर का गौरव -राजेंद्र जोशी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि व कथाकार राजेन्द्र जोशी ने शाद जामी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कलाम के माध्यम से बीकानेर का नाम देश भर में रोशन किया। जोशी ने ज़ोर देकर कहा कि शाद साहब केवल एक शायर नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और सांप्रदायिक सौहार्द्र के प्रबल समर्थक थे, यही कारण है कि आज भी हर समाज में उन्हें बेहद सम्मान के साथ याद किया जाता है।
वरिष्ठ रचनाकारों ने दी काव्यात्मक श्रद्धांजलि
क़रीब चार घंटे तक चले इस काव्य उत्सव में दो दर्जन से अधिक रचनाकारों ने अपनी कृतियां प्रस्तुत कीं।
जाकिर अदीब कार्यक्रम अध्यक्ष व उस्ताद शायर जनाबे अदीब ने शाद साहब की साहित्यिक यात्रा पर चर्चा की और अपनी ग़ज़ल के इस शेर से गहरी दाद बटोरी,
करते हैं जो बार-बार सौदा जमीर का,
वो मर चुके हैं उनको न दो मौत की सज़ा।

राजेंद्र स्वर्णकारः उन्होंने शाद जामी की शख्सियत को नज़्म में पिरोते हुए कहा,
इल्मो-अदब की शान थे, वे महफ़िलों की जान थे!!!
वे नेकदिल, वे पाकदिल, इस शहर का अभिमान थे।

डॉ ज़िया उल हसन क़ादरीः उन्होंने शाद जामी की दीनी और साहित्यिक सेवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि हाफिज़ ग़ुलाम रसूल शाद ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने ग़ज़ल पढ़ी,
बड़ी अंधेरी है इनकी ये जिंदगी देखो
जो बेचते हैं हमेशा बना-बना के चराग़।

असद अली असदः राजस्थान उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य ने नज़्म पेश की,
जहां को काम यह कर के दिखाया शाद-जामी ने,
बहाया इल्म का दरिया बहाया शाद-जामी ने।

इन रचनाकारों ने बांधा समां
मुशायरे में इमदादुल्लाह बासित, बुनियाद हुसैन ज़हीन, रवि शुक्ला, अमित गोस्वामी, मनीषा आर्य सोनी, मोनिका गौड़, डॉ कृष्णा आचार्य, शकूर सिसोदिया ’’ बीकाणवी’’, अमर जुनूनी, विप्लव व्यास और बाबूलाल छंगाणी सहित कई दिग्गजों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध किया। संस्था के अध्यक्ष मास्टर अब्दुल सत्तार ने भी शाद जामी की ग़ज़ल पढ़कर उन्हें याद किया।
गरिमामयी उपस्थिति
’’जामी उर्दू अकादमी’’ के सचिव अलीमुद्दीन जामी ने बताया कि कार्यक्रम में न केवल स्थानीय साहित्य प्रेमी, बल्कि मुंबई के फिल्मकार मंज़ूर अली चंदवानी, संगीतकार मुमताज़ ग़ुलाम मुहम्मद, साजिद सुलैमानी, ज़ाकिर नागौरी, मुहम्मद असलम एडवोकेट, शमशाद अली एडवोकेट, कुंवर नियाज़ मुहम्मद एडवोकेट और सैकड़ों की तादाद में श्रोता उपस्थित थे। संस्था द्वारा सभी रचनाकारों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. ज़िया उल हसन क़ादरी ने किया।

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