इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन (अल-बक़रह-आयत-156)
बेशक हम सब अल्लाह के लिए हैं और हमें उसी की तरफ लौट कर जाना है।
कुल्लू नफसिन ज़ायक़तुल मौत (आले-इमरान आयत-185)
हर नफ्स को मौत का मज़ा चखना है।
बीकानेर-राजस्थान राज्य के ज़िला बीकानेर से ताल्लुक रखने वाले सिपाही समाज के क़ाबिले क़द्र और ज़िंदा दिल इन्सान जो समाज के हर मौक़े पर बेबाक़ी से अपनी ज़िम्मेदारी के साथ काम को अंजाम देते रहे हैं।
मरहूम अब्दुर्रहमान कोहरी बीकानेर के नज़दीक बसे गांव रिड़मलसर में मरहूम हाजी बाबू खां कोहरी रेलवे पॉयलट और भंवरी के घर पर 12 दिसम्बर 1954 को पैदा हुए, बुनियादी तालीम जामसर में हासिल की इसलिए कि इनके वालिदे मुहतरम रेलवे कर्मचारी थे, जामसर में मैं भी उसी स्कूल में टीचर की पोस्ट पर था। तालीम के बाद उरमुल डेयरी में सरकारी ख़िदमात अंजाम दी और यहीं से इनको मास्टरजी के नाम से जाना जाने लगा।
समाज की तरक़्क़ी के लिए इन्होने हमेशा सही और पॉजिटिव राय ही दी है। इन से जो बन पाया इन्होंने समाज के लिए किया है।
इन्हीं जज़्बात के हिसाब से इनका रुख और इनके विचार मजदूर तबक़े और दबे कुचले लोगों की भलाई में लग गयेे, जहां से यह कम्युनिस्ट पार्टी और इसके विचारों से जुड़ कर कॉमरेड कहलाने लगे।
इन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य और नेशनल लेवल के संगठनों से जुड़ कर हमेशा मजदूरों की खिदमात अंजाम दी है। इनकी ख़िदमात को मजदूर तबक़ा कभी भूला नहीं पाएगा।
मरहूम अब्दुर्रहमान कोहरी जहां कम्युनिस्ट ख़यालात के थे वहीं दीनी मामलात में भी पंज वक़्ता नमाज़ी थे और सूफीवाद से जुड़े हुए थे और सूफीवाद में गहरी दिलचस्पी थी। मरहूम अब्दुर्रहमान कोहरी कम्यूनिस्ट पार्टी से जुड़े थे वहीं समाजिक संगठन प्रगतिशील सिपाही समाज के बुनियादी मेम्बर और जनरल सेक्रेटरी के औहदे पर रह कर सामाजिक संगठन का काम भलिभांति किया। उनके कम्युनिस्ट होने का इशारा इस बात से भी लगता था कि वे जब भी किसी काम के लिए बोलते तो सही और बेबाक़ी से बोलते, चाहे सामने उनके खुद के चहेते और नजदीकी लोग भी हों।
मरहूम रहमान कोहरी ग्राम पंचायत रिड़मलसर के वार्ड पंच की हैसियत से भी अपनी ज़िम्मेदारी निभा चुके है। इन्होंने मजदूर तबक़े, सहकर्मी, समाजिक, राजनीतिक और ट्रेड यूनियन के साथियों में अपनी गहरी पैठ और लोकप्रियता हासिल की और अपनी पहचान बनाई। अब्दुर्रहमान कोहरी ने डेयरी, रोडवेज, होटल संगठन, मोहता धर्मशाला कर्मचारी संघ, फेक्ट्री, खदान, कारखाना, ईंट भट्टा, मजदूरों पर हो रहे ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाई है और उन्हें क़ानूनी दायरे में रह कर न्याय दिलाया है।
आख़िर वह घड़ी और पल भी आ गया जिस में मरहूम रहमान का 20 अगस्त 2026 को एक सड़क हादसा हो गया जिस में मौक़े पर ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। यह हादसा उन लोगों को गहरा ज़ख्म दे गया जिन लोगों से इनका गहरा ताल्लुक़ रहा है। बेशक मरहूम अब्दुर्रहमान कोहरी आज हमारे बीच में नहीं है मगर उनकी खाली जगह खल रही है और मौक़े बे-मौक़े यह खाली जगह हम सब को अहसास करवाती रहेगी।
आज मरहूम अब्दुर्रहमान कोहरी को खिराजे अक़ीदत पेश कर, हम सब दोस्त, अहबाब और रिश्तेदारों की अल्लाह से दुआ है जो सारे जहानों का मालिक है, कि अल्लाह ताअला अपनी महरबानी से मरहूम को जन्नत में आला से आला मक़़ाम अता फरमाए और घर के लोगों को सब्रे जमील अता फरमाए और साथियों को इस ग़म को सहन करने की हिम्मत अता फरमाए। आमीन सुम्म आमीन।
यादों के चराग़़ दिल में जलाए बैठे हैं
तेरी इक झलक को हम तरसाए बैठे हैं
तू चला गया है तो क्या हुआ, ऐ दोस्त!
तेरी हर बात को सीने से लगाए बैठे हैं।
नाचीज़ बीकानेरी-9680868028
खि़राज-ए-अक़ीदतः अब्दुर्रहमान कोहरी की याद में



