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शिक्षक दिवस पर विशेष

भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, जो हमारे जीवन को सही दिशा देने वाले शिक्षकों और गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का एक बेहद खास अवसर है। यह दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान विद्वान और दार्शनिक डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन 5 सितम्बर 1888 तिरुतनी में पैदा हुए और 17 अप्रेल 1975 में इस संसार से विदाई ली। डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से 1906-1908 में शिक्षा प्राप्त की तथा इनको भारत रत्न, टेम्पलन पुरस्कार, ऑर्डर ऑफ मेरिट, शांति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1952 से 1962 तक भारत के उप राष्ट्रपति और उसके बाद 13 मई 1962 से 1967 राष्टपति रहे।
यह एक महान दार्शनिक,प्रख्यात शिक्षाविद, और भारतीय संस्कृति के संवाहक थे। शिक्षा और छात्रों के प्रति उनके अगाध प्रेम के कारण ही उनके जन्म दिन पर समूचे भारत में शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। उन्होंने भारतीय दर्शन (विशेष कर वेदांत) को वेश्विक मंच पर पहचान दिलाई और पूर्वी और पश्चिमी दर्शन के बीच एक मज़बूत सेतु का काम किया। आप हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस के कुलाधिपति भी रहे। राजनीति में आने से पहले वे सोवियत संध में राजदूत थे।
गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष॥

भारतीय संस्कृति में गुरु के स्थान को बहुत अहमियत दी गई है। शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे छात्रों के चरित्र का निर्माण करते हैं और हमें एक अच्छा इंसान बनाते हैं। शिक्षक दिवस इसी अमूल्य योगदान के लिए अपने शिक्षकों को धन्यवाद कहने का दिन है। शिक्षक दिवस का इतिहास भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई थी। जब डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ छात्रों और मित्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। इस पर डॉ, सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा, यदि मेरा जन्मदिन मनाने के बजाय इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए बहुत बड़े गर्व की बात होगी। तब से हर साल 5 सितंबर को देशभर में यह दिवस धूमधाम से मनाया जाने लगा। शिक्षक का समाज में महत्व भविष्य के निर्माता और समाज की रीढ़ होते हैं। वे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अच्छे नागरिक तैयार करके देश का भविष्य बनाते हैं। मार्गदर्शक- जैसे एक कुम्हार मिट्टी को सुंदर आकार देता है, वैसे ही शिक्षक विद्यार्थियों की कमियों को दूर कर उनके हुनर को तराशते हैं। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं गुरु शब्द का अर्थ ही अंधकार से निकालने वाला है। अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाने वाला। वे हमें अज्ञानता से ज्ञान के मार्ग पर ले जाते हैं, शिक्षक दिवस पर स्कूल और कॉलेजों में पढ़ाई का काम रोक कर पूरी तरह उत्सव का माहौल रहता है। छात्र अपने शिक्षकों के सम्मान में भाषण, नाटक, गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस दिन कई स्कूलों में वरिष्ठ कक्षाओं के छात्र खुद शिक्षक बनते हैं और छोटी कक्षाओं को पढ़ाकर शिक्षकों की ज़िम्मेदारी का अनुभव करते हैं। विद्यार्थी अपने प्रिय शिक्षकों को अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसके साथ ही, राज्य और केंद्र सरकार द्वारा इस दिन बेहतरीन कार्य करने वाले देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।
शिक्षक हमारे जीवन का वह दीपक हैं जो खुद जल कर दूसरों के जीवन में उजाला करते हैं। आधुनिक दौर में भले ही पढ़ाई के तरीके़ बदल गए हों, लेकिन एक गुरु का स्थान कोई तकनीक या कंप्यूटर नहीं ले सकता। हमारा यह कर्तव्य है कि हम सदैव अपने शिक्षकों का आदर करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर देश का नाम रोशन करें।
क्या दूं तुम्हें गुरु दक्षिणा मन ही मन में यह सोचूं
कैसे चुक सकेगा क़र्ज़ तुम्हारा, जीवन सारा चाहे दे दूं।

’’’’’’’’
दिया ज्ञान का भंडार मुझे किया भविष्य के लिए तैयार मुझे
जो किया आपने उस उपकार के लिए नहीं है शब्द मेरे पास आभार के लिए।

शिक्षक का मार्गदर्शन और ज्ञान ही हमारे सपनों की नींव होता है शिक्षक दिवस की
शुभकामनाएं।

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